Thursday, May 22, 2014

Does Indian cinema need a renaissance to be more socially productive ?


Jaipurkhabar : Does Indian cinema need a renaissance to be more socially productive ?
In an industry where a large section of films have been borrowed, adapted or inspired from the Hollywood (hence an unoriginal copycat name : Bollywood ) we find a surprising lack of quality cinema in India.

In the west, the movies are made on a vast array of subjects - social, political, scientific and artistic.
We, in the 'Bollywood' have simply copied the sexually suggestive, sometimes vulgar, depictions of sex and romance.

We never seem to have gotten beyond it - except of course a few exceptions here and there.
Our cinema, they say, has changed a lot in the past decade. But then why have majority of movies not gone beyond subjects of sex and affairs?

From dancing around the trees to suggestive moves around the bedroom. Is that all of variation we can afford with all the talent that we have at our disposal ?
Do make those teeny romantic movies, by all means, but can we please move on to movies that really inspire people to achieve bigger things in life ?
To be someone better and greater rather than inspired to chase girlfriends and petty physical needs ?

Given the immense reach and effectiveness of this medium of mass communication, it's surprising how little importance and attention it has been given by the people who want to take the nation in the right direction.
Not just entertainment, our movie industry can deliver a lot more.

But instead, they are delivering sleaze, sex and melodrama.

Someday, we shall understand our mistake.

Hope it's sooner than later.

Monday, December 9, 2013

Maggi

इस जानकारी को कृपया अनदेखा न कीजिये ।




खासकर के वो लोग जो की मैगी खाते है । यह जानकारी पढने में आपको मात्र २ मिनट का समय लगेगा ।

मैगी के बारे में सात भयानक तथ्य :

एक विदेशी देश में, घर से दूर है, खासकर जब हम में से कई "मैगी" के बिना नहीं रह सकते हैं| यहाँ हम मैगी लेने के संभावित स्वास्थ्य जोखिम की जानकारी साझा कर रहे हैं ताकि आप अनजाने में मांसाहार खाने से बच पाए | आप इसे चेतावनी के रूप में रखने के लिए इस प्रिंट कर सकते है , रसोई घर में यह पिन अप कर सकते है |

1. अट्टा मैगी जो होता है उसमे Bactosoytone नामक तत्त्व शामिल होता है जो DSG (Disodium ग्लूटामेट), स्वाद-627 के नीचे छिपा हुआ होता है , जो कि सामग्री में नहीं लिखा जाता . Bactosoytone अपने आप में एक उत्प्रेरक एंजाइम है, जो की सुअर का उपयोग(सुअर की आंत से ली गई है) कर सोया प्रोटीन से बना है ।

2. तत्काल नूडल्स लेबल पर मुद्रित वर्तमान खाना पकाने के निर्देश गलत है।
आम तौर पर, हम तत्काल नूडल्स पकाने के तरीके में पानी के साथ एक बर्तन में नूडल्स डाल कर, पाउडर डालकर पकाते है। और यह लगभग 3 मिनट के लिए खाना बनाना और फिर इसे खाने के लिए तैयार करते हैं. (ये गलत है )

3. नेस्ले को मैगी ब्रांड से उनके विज्ञापन पर आलोचना का सामना करना पड़ा है । वो विकसित देशों में विपणन(मार्केटिंग) के नियमों का पालन करते है , लेकिन विकासशील देशों में ये भ्रामक और गुमराह करने वाले विज्ञापन से विनियमन(रेगुलेशन) के परमिट का उल्लंघन करती है, क्यूंकि विकासशील देहो में अत्यधिक भ्रष्टाचार के कारण कानूनों को खरीदा जा सकता है।

4. सूखी और कुरकुरे नूडल्स में मोम होता है, जो कि 4 से 5 दिनों के लिए शरीर के अंदर रहने में सक्षम होता है।

5. एक विज्ञापन में झूठे दावे किए गए कि नूडल्स से "मजबूत मांसपेशियों, हड्डियों और बाल का निर्माण करने में मदद" होगी । ब्रिटिश विज्ञापन मानक प्राधिकरण विज्ञापन विज्ञापनदाताओं स्वास्थ्य दावों के सबूत प्रदान किया है जिसके द्वारा यूरोपीय संघ के नए उपभोक्ता संरक्षण कानून का पालन नहीं किया है।

6. नूडल्स के एक सेवारत (1 ब्लॉक या 100 ग्राम) 1170 मिलीग्राम शामिल हैं - सोडियम उर्फ नमक और हम सभी जानते हैं कि नमक पूरी दुनिया में रक्तचाप और दिल के रोगियों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार है।

7. पानी में "अलग से पैक तत्वों" को उबालने से वो परिवर्तित हो कर विषाक्त MSG (मोनोसोडियम ग्लूटामेट) में बदल जाता है - जो कि मस्तिष्क को 'साइलेंट क्षति' पहुंचाता है, अनुसंधानों में ऐसा पाया गया है कि यह अस्थमा के हमलों से जुड़ा हुआ है, अक्षम गठिया, और गंभीर डिप्रेशन,जो बच्चों में व्यवहार की समस्याओं के कारण है । MSG के अन्य सभी खाद्य जहर, विष और एलर्जी से अधिक विषाक्त होना पाया गया है|

मैगी माँसाहारी है --- आप घर पर यह प्रयोग करने की कोशिश कर सकते है ।
चिकन मैगी सूप पाउडर और शाकाहारी मैगी नूडल्स मसाला पाउडर दोनों को उबाल लें।
उन दोनों का उबलने के बाद एक ही स्वाद होगा।
इसके बारे में सोचो |

Wednesday, December 4, 2013

Indian Low


Tours In India, Tours, Hotel Booking in Jaipur, Package tour to India

हिंदुस्तान की न्याय व्यवस्था में काम करने वाले जो एडवोकेट्स मित्र है उनसे माफ़ी मांगते हुए आप सबसे ये पूछता हूँ के क्या आप जानते है यह काला कोट पेहेनके अदालत में क्यों जाते है ? क्या काले को छोड़ के दूसरा रंग नही है भारत में ? सफ़ेद नही है नीला नही है पिला नही है हरा नही है ?? और कोई रंग ही नही है कला ही कोट पहनना है ।


वो भी उस देश की न्यायपालिका में जहाँ तापमान 45 डिग्री हो। तो 45 तापमान जिस देशमे रहता हो उहाँ के वोकिल काला कोट पेहेनके बहेस करे, तो बहस के समय जो पसीना आता है वो और गर्मी के कारन जो पसीना आता है वो, तरबतर होते जाये और उनके कोट पर पसीने से सफ़ेद सफ़ेद दाग पड़ जाये पीछे कोलार पर और कोट को उतारते ही इतनी बदबू आये की कोई तिन मीटर दूर खिसक जाये लेकिन फिर भी कोट का रंग नही बदलेंगे। क्योंकि ये अंग्रेजो का दिया हुआ है। आपको मलिम है अंग्रेजो की अदालत में काला कोट पहनके न्यायपालिका के लोग बैठा करते थे। और उनके यहाँ स्वाभाविक है क्योंकि उनके यहाँ नुन्यतम -40 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान होता है जो भयंकर ठण्ड है । तो इतनी ठण्ड वाली देश में काला कोट ही पेहेनना पड़ेगा कियोंकि वो गर्मी देता है। ऊष्मा का अच्छा अवशोषक है। अन्दर की गर्मी को बाहर नही निकलने देता और बाहर से गर्मी को खिंच के अन्दर डालता है । इसीलिए ठण्ड वाले देश के लोग काला कोट पेहेनके अदालत में बहस करे तो समझ में आता है पर हिंदुस्तान के गरम देश के लोग काला कोट पेहेनके बहस करे !!!!!! 1947 के पहले होता था समझमे आता है पर 1947 के बाद भी चल रहा है ??? हमारी बार काउन्सिल कोइत्नि समझ नही है क्या? के इस छोटी सी बात को ठीक कर ले बदल ले । सुप्रीम कोर्ट की बार काउन्सिल है हाई कोर्ट की बार काउन्सिल है डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की बार काउन्सिल है सभी बार काउन्सिल मिलके एक मिनट में फैसला कर सकते है की काल से हम ये काला कोर्ट नही पहनेंगे। वो तो भला हो हिंदुस्तान में कुछ लोगों का हमारे देश पहले अंग्रेज न्यायाधीश हुआ करते थे तो सर पे टोपा पेहेनके बैठते थे, उसमे नकली बाल होते थे। आज़ादी के बाद 40 -५० साल तक टोपा लगा कर यहाँ बहुतसारे जज बैठते रहे है इस देश की अदालत में। अभी यहाँ क्या विचित्रता है के काला कोट पेहेन लिया ऊपर से काला पंट पेहेन लिया, बो लगा लिया सब एकदम टाइट कर दिया हवा अन्दर बिलकुल न जाये फिर मांग करते है के सभी कोट में एयर कंडीशनर होना चाहिए!! ये कोट उतर के फेंक दो न एयर कंडीशन की जरुरत क्या है ? और उसके ऊपर एक गाउन और लाद लेते है वो निचे तक लहंगा फैलता हुआ। ऐसी विचित्रताए इस देश में आज़ादी के ६० साल बाद भी दिखाई दे रहा है। अंग्रेजो की गुलामी की एक भी निशानी को आज़ादी के 65 साल में हमने मिटाया नही, सबको संभाल के रखा है।

Friday, August 23, 2013

Anjana Dhavalu Thamake won Gold Medal at Asian Youth Games






The Indian Athlete Anjana Dhavalu Thamake won gold Medal in girl's 800 meters race at 2nd Asian Youth games -She won the gold with 2:11.47 in the 800 Meters race .

Friday, August 9, 2013

Teen Genius drops out of college to make it big






Diwank singh tomer 19 other young and exceptional youngsters from around the whole world to become a Thiel fellow.The foundation's fellowship comes with a $ 100,000 cheque,whom is the legendary Peter Thiel-Paypal co-founder and Facebook's first investor.

Sunday, July 28, 2013

Helicopter man in India






Abhmanyu samal fron Odisha,India.These days,he is know helicopter man in India.Because he made a helicopter with using scooter engine.Abhmanyu samal spend almost 2 year for this project and also he was made only 40,000 indian rupees.In news option this helicopter has a tank of 5litres and it will fly 120kms per hour.